भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में वह अभी भी आयात पर निर्भर है। जबकि मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिफेंस सिस्टम, और AI जैसी हर आधुनिक तकनीक की नींव सेमीकंडक्टर पर टिकी है, भारत की डोमेस्टिक उत्पादन क्षमता अभी भी शुरुआती चरण में है।
सरकार ने भले ही ‘सेमीकॉन इंडिया’ मिशन के तहत महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं, लेकिन कई चुनौतियाँ इस सपने को साकार होने से रोक रही हैं।
आइए समझते है भारत को सेमीकंडक्टर सुपरपावर बनने से क्या रोक रहा है और भविष्य की संभावनाएं है।
क्या है मामला?
2021 में, भारत सरकार ने ₹76,000 करोड़ के सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत, सरकार सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब स्थापित करने वाली कंपनियों को 70% तक की वित्तीय सहायता दे रही है।
वर्तमान में भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए 65-70% कंपोनेंट्स का आयात करता है, जिनमें से अधिकांश चीन से आते हैं। यह निर्भरता देश की तकनीकी सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसलिए सरकार का उद्देश्य भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर निर्माताओं के लिए एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने का है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं।
भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
भारत को सेमीकंडक्टर सुपरपावर बनने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
- साझेदारी विफलताएँ: Kaynes Semicon और Aptos Technology के बीच 2024 में डील विफल रहा, और फॉक्सकॉन-वेदांता का 2022 का जॉइंट वेंचर सब्सिडी में देरी और रणनीति असहमति के कारण विफल रहा।
- ग्लोबल प्लेयर्स की अनिच्छा: ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC), यूनाइटेड माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन (UMC), और वर्ल्ड एडवांस्ड ने भारत में संचालन से इंकार कर दिया। पावरचिप बिना लॉन्गटर्म प्रतिबद्धता के केवल टेक्नोलॉजी प्रदान करने तक सीमित है।
- वित्तीय और ऑपरेशनल जोखिम: सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री अत्यधिक पूंजी की आवश्यकता होती है, जिसमें एक फैब की लागत लगभग 10 बिलियन डॉलर है और प्रोफिटेबिलिटी तक पहुँचने में वर्षों लगते हैं।
इसके अलावा, कुशल वर्कफाॅर्स की कमी एक बड़ी समस्या है, 2027 तक 2,50,000-3,00,000 की कमी का अनुमान है। सप्लाई चैन में बाधाएँ भी प्रगति को रोक रही हैं। ग्लोबल स्तर पर, ताइवान और दक्षिण कोरिया 80% मार्केट नियंत्रित करते हैं, और ASML का EUV लिथोग्राफी पर एकाधिकार भारत के लिए चुनौती है।
भारत की नई सेमीकंडक्टर यूनिट्स

गुजरात, महाराष्ट्र और असम में लग रहे हैं हाई-टेक सेमीकंडक्टर फ़ैब्रिकेशन और टेस्टिंग प्लांट, जो देश की डिजिटल जड़ों को मज़बूत करेंगे।
भारत सेमीकंडक्टर उत्पादन में तेजी से निवेश कर रहा है। गुजरात के ढोलेरा में टाटा ग्रुप और पावरचिप (ताइवान) ₹91,526 करोड़ की फैब यूनिट बना रहे हैं, जो 2026 के अंत तक उत्पादन शुरू करेगी।
माइक्रोन की साणंद (Sanand) यूनिट मेमोरी चिप्स की पैकेजिंग और टेस्टिंग पर केंद्रित है, जबकि फॉक्सकॉन-HCL जेवर (UP) में ₹3,700 करोड़ की डिस्प्ले ड्राइवर चिप फैक्ट्री स्थापित कर रहे हैं। साणंद में CG पावर, Renesas और STARS माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स की साझेदारी से आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) यूनिट बन रही है।
इसके अलावा, कायनेस टेक्नोलॉजी को भी सितंबर 2024 में साणंद में OSAT यूनिट की मंजूरी मिल चुकी है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
इन बाधाओं के बीच निवेशकों के लिए बड़े अवसर भी हैं। सबसे पहले, डोमेस्टिक मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। 2023 में भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट $45 बिलियन था और 2030 तक $100 बिलियन पार करने का अनुमान है। स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स की डिमांड के चलते यह और बढ़ने की संभावना है। भारत ग्लोबल 5G स्मार्टफोन मार्केट में दूसरे नंबर पर है, जिससे डोमेस्टिक चिप डिमांड में निरंतर वृद्धि होगी।
सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए भारी प्रोत्साहन दिए हैं; उदाहरण के लिए सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत 70% तक की सब्सिडी और PLI स्कीम से पांच लाख करोड़ रुपये के उत्पादन की सुविधा मिली है, जो सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश को और भी आकर्षक बनाती है।
भविष्य की बातें
2030 तक ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट $1 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें भारत 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस मिशन को समर्थन देने के लिए सरकार ने ₹76,000 करोड़ का बजट तय किया है और हर साल सेमीकॉन इंडिया जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रही है।
सितंबर 2025 में दिल्ली में होने वाला अगला सम्मेलन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और SEMI द्वारा आयोजित होगा, जिसमें 18 देशों की 300+ कंपनियां भाग लेंगी। यह भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के प्रति कमिटमेंट को दिखाता है।
टेक्नोलॉजी लक्ष्य के तौर पर भारत 2030 तक 14nm+ नोड्स पर फैब्रिकेशन शुरू करना चाहता है, जबकि 10nm से नीचे की तकनीकों में अभी समय लगेगा। इसके साथ ही, 2047 तक भारत 50% डोमेस्टिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जो $1.5 ट्रिलियन का अवसर बना सकता है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर