भारत की मोबाइल फोन इंडस्ट्री पिछले कुछ वर्षों में जिस गति से विकसित हुई है, वह ग्लोबल स्तर पर एक नया अध्याय लिख रही है। देश ने न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाई है बल्कि मोबाइल निर्यात को भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन चुका है, जबकि स्मार्टफोन निर्यात में 200% की उल्लेखनीय बढ़त देखने को मिली है। यह उछाल केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह इंडस्ट्री भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नीति समर्थन और ग्लोबल टेक कंपनियों के बढ़ते भरोसे का प्रत्यक्ष संकेत है।
सवाल यह है कि क्या भारत इस रफ्तार को कायम रखते हुए मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का नया ग्लोबल हब बन सकता है?
क्या है मामला?
भारत के स्मार्टफोन निर्यात में रिकॉर्ड तेजी देखी जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल–नवंबर 2025 के दौरान निर्यात 5.7 बिलियन डॉलर बढ़ा, जिससे स्मार्टफोन देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला निर्यात सेक्टर बन गया। यह वही श्रेणी है जो 2015 में निर्यात सूची में 167वें स्थान पर थी और अब भारत की ग्लोबल पहचान बना रही है।
अप्रैल–नवंबर FY24 में 9.07 बिलियन डॉलर रहे स्मार्टफोन निर्यात FY26 में बढ़कर 18.8 बिलियन डॉलर हो गए। यह उछाल मुख्य रूप से अमेरिका के कारण है, जहां भारतीय स्मार्टफोन्स की डिमांड में 200% वृद्धि दर्ज हुई और जिसने कुल निर्यात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा खरीदा।
अमेरिका के अलावा कई अन्य देशों में भी भारत के स्मार्टफोन्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है। संयुक्त अरब अमीरात के लिए निर्यात में 62% और चीन को भेजी गई शिपमेंट्स 565% उछलकर नए स्तर पर पहुंच गईं। यूरोप में भी भारत का विस्तार जारी है पुर्तगाल में 10% और स्पेन में 8% की वृद्धि देखने को मिली। इसके साथ ही भारत ने स्लोवाकिया, इज़राइल, लातविया, वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में भी कदम बढ़ाते हुए अपनी नए-युग की निर्यात उपस्थिति बनाई है।
भारत के स्मार्टफोन निर्यात में रिकॉर्ड छलांग
2025 भारत के स्मार्टफोन निर्यात के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। इस वर्ष 30 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जो पिछले पाँच वर्षों के कुल स्मार्टफोन निर्यात का लगभग 38% है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच कुल निर्यात करीब 79.03 बिलियन डॉलर तक पहुंचा, जिसमें 2025 अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक योगदानकर्ता रहा।
इस तेज़ वृद्धि में एप्पल आईफोन का सबसे बड़ा हाथ रहा, जिसने कुल स्मार्टफोन निर्यात का लगभग 75% हिस्सा दिया और 22 बिलियन डॉलर से अधिक का योगदान किया। 2025 का निर्यात आंकड़ा पिछले वर्ष के 20.45 बिलियन डॉलर की तुलना में 47% अधिक है, जो भारत की मजबूत होती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दर्शाता है।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की नई उड़ान
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2024-25 में लगभग ₹11.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो देश की तेजी से बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का स्पष्ट संकेत है। इसी गति को आगे बढ़ाते हुए, एप्पल आईफोन निर्यात 2024 की तुलना में लगभग 85% की जबरदस्त वृद्धि के साथ 2025 में पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंच गए।
इसके साथ ही, एप्पल ने देश में पांच आईफोन असेंबली यूनिट्स के साथ एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस खड़ा किया है, जिनमें तीन टाटा समूह और दो फॉक्सकॉन द्वारा संचालित हैं। इस विस्तार का सीधा असर उत्पादन और निर्यात दोनों पर दिख रहा है। साथ ही, मोबाइल फोन PLI योजना ने 2025–26 तक इंडस्ट्री को लगातार समर्थन दिया है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
भारत के स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में आ रही तेज़ छलांग शेयर मार्केट निवेशकों के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि देश अब ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग चेन में स्थायी जगह बना रहा है। 2025 में स्मार्टफोन निर्यात का 30 बिलियन डॉलर तक पहुँचना और इसमें अकेले आईफोन का ₹2 लाख करोड़ से अधिक योगदान, यह दिखाता है कि प्रीमियम डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग भारत की नई ताकत बन चुकी है। यह रुझान उन कंपनियों के लिए अवसर बढ़ाता है जो कंपोनेंट्स, EMS, सप्लाई-चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हैं।
निवेशकों के लिए यह अवसर उन स्टॉक्स की पहचान करने का है जो भारत की नई निर्यात ग्रोथ स्टोरी के सीधा हिस्सेदार हैं और जहाँ आने वाले वर्षों में मजबूत, संरचनात्मक रिटर्न की गुंजाइश मौजूद है।
भविष्य की बातें
भारत आने वाले वर्षों में ग्लोबल मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बनता दिख रहा है। ICEA का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में मोबाइल उत्पादन 75 बिलियन डॉलर और निर्यात 30 बिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच जाएगा। यह वही बदलाव है जिसने भारत को चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बना दिया है, जहां 99% से अधिक फ़ोन अब देश में ही बनते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के 4 ट्रिलियन रुपये पार करने और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की गति बढ़ने से भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में हाई वैल्यू वाली भूमिका में प्रवेश कर रहा है। स्मार्टफोन PLI योजना 2026 में खत्म होने वाली है, लेकिन सरकार इसे बढ़ाने पर विचार कर रही है, जिससे कंपनियों को छह में से किसी भी पाँच लगातार वर्षों तक प्रोत्साहन लेने की सुविधा मिलेगी।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर