NSE ने लॉट साइज में किया बदलाव: निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट

NSE Cuts F&O Lot Size: Major Changes Explained!
Share

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसके तहत फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में प्रमुख चार इंडेक्स के लिए लॉट साइज को कम कर दिया गया है। यह फैसला निफ्टी 50 सहित अन्य तीन इंडेक्स पर लागू होगा, जिसका सीधा असर लाखों रिटेल निवेशकों पर पड़ेगा।

28 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होने वाला यह कदम, मार्केट को अधिक सुलभ बनाने और छोटे निवेशकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है । आइए विस्तार से समझते हैं कि यह बदलाव क्या है और यह निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है।

क्या है मामला?

NSE ने अक्टूबर 03, 2025 को एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें निफ्टी 50 के फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट के लॉट साइज को 75 से घटाकर 65 कर दिया है। इसी तरह, निफ्टी बैंक का लॉट साइज 35 से 30, निफ्टी फाइनैंशियल सर्विसेज का 65 से 60 और निफ्टी मिड सेलेक्ट का 140 से 120 कर दिया गया है। जबकि, निफ्टी नेक्स्ट 50 के लॉट साइज में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस बदलाव का उद्देश्य कॉन्ट्रैक्ट के कुल वैल्यू को नियंत्रित करना है ताकि वह सटीक और सुलभ रहे और कॉन्ट्रैक्ट के मार्जिन की आवश्यकता थोड़ी कम हो सके। यह कदम SEBI की गाइडलाइन के अनुसार हर छह महीने में कॉन्ट्रैक्ट की समीक्षा करने का हिस्सा है, जिससे कि जोखिम और एक्सपोजर संतुलित रह सके।

ट्रांजेक्शन पर असर और मार्केट की प्रतिक्रिया

लॉट साइज में कमी का सीधा प्रभाव यह होगा कि कॉन्ट्रैक्ट की कुल वैल्यू कम हो जाएगी, जिससे नए और छोटे निवेशकों के लिए ट्रेडिंग करना अधिक सुलभ और किफायती हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर, निफ्टी 50 का पुराना लॉट 75 यूनिट का था, जिसमें मान लीजिए निफ्टी 24,800 पर ट्रेड कर रहा है, तो कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू लगभग 18.6 लाख रुपये होता था, जबकि अब 65 के लोट के हिसाब से यह लगभग 16.1 लाख रुपये का रहेगा। इसका मतलब, मार्जिन की जरूरत भी करीब 2.04 लाख से घटकर 1.77 लाख रुपये हो जाएगी।

हालांकि, रिटेल निवेशकों के लिए इसका असर सीमित रहेगा क्योंकि मार्जिन में केवल मामूली कमी आएगी। इसके अलावा, कुछ कॉन्ट्रैक्ट कॉम्बिनेशन पर डे स्प्रेड ऑर्डर बुक अस्थायी रूप से बंद की जाएगी ताकि ट्रेडिंग और क्लियरिंग प्रक्रियाओं में सहजता रहे।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

निवेशक, खासकर रिटेल ट्रेंडर, नए नियमों से सीधे लाभान्वित होंगे। छोटे लॉट साइज से वे कम पूंजी लगाकर भी F&O में ट्रेड कर सकेंगे, जिससे उनका जोखिम भी कम होगा। इसके अलावा, NSE की इस पहल से मार्केट की पारदर्शिता भी बढ़ेगी और फ्यूचर्स-ऑप्शंस मार्केट के वॉल्यूम में भी सुधार हो सकता है।

फिर भी, निवेशकों को नए लॉट साइज के अनुरूप अपनी ट्रेडिंग रणनीतियां एडजस्ट करनी होंगी और डे स्प्रेड ऑर्डर बुक में कुछ सीमाओं को समझकर अपने रिस्क मैनेजमेंट का ध्यान रखना होगा। इसलिए, यह समय है कि निवेशक इस बदलाव के अनुसार जागरूक हों और इस बदलाव का फायदा उठाएं।

भविष्य की बातें

यह सर्कुलर 28 अक्टूबर 2025 (EOD) से प्रभावी होगा। साप्ताहिक और मासिक कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मौजूदा लॉट साइज 30 दिसंबर 2025 की एक्सपायरी तक लागू रहेगा, जबकि क्वार्टरली और हाफ-ईयरली कॉन्ट्रैक्ट्स का लॉट साइज उसी दिन (EOD) संशोधित किया जाएगा।

साथ ही, NSE ने बताया कि डे स्प्रेड ऑर्डर बुक नवंबर 2025 से फरवरी 2026 तक के कॉम्बिनेशन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए उपलब्ध नहीं होगी। एक्सचेंज ने अपने सभी सदस्यों को सलाह दी है कि वे क्लाइंट्स को नई व्यवस्था की जानकारी समय रहते दें, ताकि ट्रेडिंग में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Edge Subscription Fee
Min. Investment

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top