भारतीय शेयर मार्केट में दिवाली का समय सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक भी है। इसे ‘संवत’ की शुरुआत माना जाता है, और निवेशक इस दौरान सकारात्मक माहौल की उम्मीद करते हैं। इसी सेंटीमेंट के चलते ‘दिवाली रैली’ या ‘संवत रैली’ की चर्चा आम हो जाती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह रैली सिर्फ़ कुछ दिनों का त्योहारी उत्साह है, या यह लॉन्गटर्म के मुनाफ़े की एक मज़बूत नींव रखती है? इस सवाल का जवाब अटकलों में नहीं, बल्कि आंकड़ों में छिपा है।
इस आर्टिकल में, हम विस्तृत आंकड़ों का विश्लेषण करेंगे ताकि दिवाली के बाद मार्केट के ट्रेंड, सेक्टोरल प्रदर्शन और विभिन्न एसेट्स के व्यवहार को समझ सकें।
संवत 2080 का विश्लेषण
संवत 2080, जो 1 नवंबर 2024 को समाप्त हुआ, निवेशकों के लिए एक असाधारण रूप से फायदेमंद साल साबित हुआ। इस अवधि के दौरान मार्केट में काफी तेजी देखी गई, जिसमें प्रमुख इंडेक्स ने प्रभावशाली रिटर्न दिया। सेंसेक्स में 22.2% की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी50 ने 24.5% का शानदार रिटर्न दिया। यह प्रदर्शन मार्केट में एक मजबूत तेजी की भावना को दर्शाता है।
साथ ही, BSE मिड-कैप इंडेक्स ने 41.2% की जबरदस्त छलांग लगाई और BSE स्मॉल-कैप इंडेक्स ने 43.3% के बेहतरीन रिटर्न दिए। यह दर्शाता है कि संवत 2080 में निवेशकों का विश्वास केवल बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने छोटी और मध्यम साइज की कंपनियों पर भी भारी भरोसा दिखाया।
इसके अलावा, मेटल्स ने भी इक्विटी मार्केट के साथ कदम मिलाते हुए मजबूत प्रदर्शन किया। गोल्ड की प्राइस में 29.7% की वृद्धि हुई, जबकि सिल्वर ने 32.8% का रिटर्न दिया। कुल मिलाकर, संवत 2080 एक ऐसा साल था जहाँ लगभग हर एसेट क्लास ने निवेशकों को लाभ दिया।
संवत 2081 का विश्लेषण
संवत 2080 की शानदार तेजी के बाद, संवत 2081 ने मार्केट की गति में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाया। इस साल (अक्टूबर 20, 2025 तक) प्रमुख इंडेक्स का रिटर्न बहुत मामूली रहा। सेंसेक्स में केवल 5.8% की वृद्धि हुई, और निफ्टी50 ने 6.3% का रिटर्न दिया। यह पिछले साल के 20% से अधिक के रिटर्न की तुलना में एक स्पष्ट मंदी का संकेत है।
यह धीमापन मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में भी था। BSE मिड-कैप इंडेक्स लगभग फ्लैट रहा और उसने केवल 0.9% का रिटर्न दिया, जबकि BSE स्मॉल-कैप इंडेक्स ने 4.1% की गिरावट दर्ज की। यह संवत 2080 के 40% से अधिक के रिटर्न से बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश करता है, जो मार्केट में वोलैटिलिटी को दर्शाता है।
हालांकि, इस सुस्त इक्विटी प्रदर्शन के बीच, कीमती मेटल्स ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया। गोल्ड की प्राइस में 62.2% की भारी वृद्धि हुई और चांदी ने 82.7% की आश्चर्यजनक छलांग लगाई। यह ट्रेंड बताता है कि संवत 2081 में निवेशकों ने इक्विटी से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने एसेट्स जैसे गोल्ड और सिल्वर में निवेश किया, जो अक्सर आर्थिक अनिश्चितता का संकेत होता है।
सेक्टोरल प्रदर्शन: कौन चमका, कौन पिछड़ा?
जब हम संवत वर्ष के दौरान सेक्टोरल प्रदर्शन को देखते हैं, तो मार्केट की एक बहुत ही विभाजित तस्वीर सामने आती है। कुछ सेक्टर ने ड्यूल डिजिट में रिटर्न दिया, जबकि अन्य को भारी नुकसान हुआ। जहां PSU बैंक (15.92%) बढ़ा, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 14.86%, निफ्टी बैंक (12.31%) और प्राइवेट बैंक (12.15%) ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। ऑटो सेक्टर ने भी 14.2% के रिटर्न के साथ अपनी चमक बिखेरी, वही कंजम्पशन सेक्टर ने 9.25% का अच्छा रिटर्न दिया।

दूसरी ओर, कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स दबाव में रहे। मीडिया सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जिसमें -24.39% की भारी गिरावट आई। IT सेक्टर में भी -18.63% की बड़ी गिरावट देखी गई। इसके अलावा, एनर्जी, रियल्टी, FMCG और फार्मा जैसे डिफेंसिव माने जाने वाले सेक्टर्स ने भी नकारात्मक रिटर्न दिया। यह सेक्टोरल प्रदर्शन स्पष्ट रूप से दिखाता है कि संवत 2081 में मार्केट की तेजी कुछ चुनिंदा सेक्टर्स तक ही सीमित थी, और व्यापक मार्केट में कमजोरी का माहौल था।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
आंकड़ों का विश्लेषण एक स्पष्ट निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि मार्केट की प्रकृति डायनामिक है और हर संवत वर्ष एक जैसा नहीं होता। संवत 2080 ने जहाँ एक व्यापक और मजबूत तेजी का प्रदर्शन किया, वहीं संवत 2081 ने धीमी वृद्धि, सेक्टोरल रोटेशन और कीमती मेटल्स की ओर एक महत्वपूर्ण झुकाव दिखाया। ‘शॉर्ट-टर्म उछाल’ और ‘लॉन्ग-टर्म मुनाफ़ा’ के बीच का चुनाव मार्केट की मौजूदा स्थितियों पर बहुत अधिक निर्भर करता है।
निवेशकों के लिए मुख्य सीख यह है कि केवल ‘दिवाली रैली’ का सेंटीमेंट पर निवेश करना पर्याप्त नहीं है। एक सफल निवेश रणनीति के लिए विभिन्न एसेट्स जैसे इक्विटी, गोल्ड, सिल्वर और विभिन्न सेक्टर्स में डायवर्सिफिकेशन करना उचित है क्योंकि यह जोखिम को काफी हद तक कम करने में सहायक है।
दिवाली के बाद रैली: आखिर शॉर्ट-टर्म पॉप है या लॉन्ग-टर्म गेन?
जवाब है – दोनों, लेकिन शर्तों के साथ। पिछले पांच वर्षों के डेटा बताते हैं कि दिवाली के बाद मार्केट का रुख हर बार एक जैसा नहीं रहा है। उदाहरण के लिए, CY2020 और CY2023 में निफ्टी ने दिवाली के बाद सिर्फ एक महीने में क्रमशः 6.06% और 7.07% की तेज़ बढ़त दर्ज की, जबकि CY2021 और CY2024 में क्रमशः –4.01% और –0.11% की गिरावट आई। इसी तरह छह महीने के आधार पर CY2020 में 14.84% और CY2023 में 12.96% का मजबूत रिटर्न देखने को मिला, जबकि CY2021 में –6.92% की गिरावट रही।

यह दिखाता है कि पोस्ट-दिवाली रैली का कोई निश्चित पैटर्न नहीं है इसका असर सेक्टर और सेंटिमेंट पर निर्भर करता है। इस साल फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि IT और मीडिया पीछे रहे। वहीं, गोल्ड-सिल्वर जैसे एसेट्स ने यह साबित किया कि डाइवर्सिफिकेशन और धैर्य लंबे समय में बेहतर रिटर्न दिला सकते हैं।
निष्कर्ष साफ है पोस्ट-दिवाली रैली न तो सिर्फ शॉर्ट-टर्म पॉप है, न ही गारंटीड लॉन्ग-टर्म गेन, बल्कि एक अवसर है उन निवेशकों के लिए जो सही सेक्टर चुनते हैं, डायवर्सिफिकेशन रखते हैं और धैर्य बनाए रखते हैं।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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