क्यों बढ़ रही है भारत में प्रोटीन फूड्स की डिमांड?

क्यों बढ़ रही है भारत में प्रोटीन फूड्स की डिमांड?
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भारत में हेल्थ और फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता ने प्रोटीन मार्केट को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया है। पहले जहां प्रोटीन सप्लीमेंट्स का उपयोग केवल बॉडीबिल्डर्स या एथलीट्स तक सीमित था, वहीं अब यह आम उपभोक्ताओं की जरूरत बन चुका है। तेजी से बदलती जीवनशैली, शहरी जनसंख्या में बढ़ती हेल्थ कंसर्न और प्लांट-बेस्ड डाइट की लोकप्रियता ने इस मार्केट को तेजी से बढ़ने पर मजबूर कर दिया है। आज भारत का प्रोटीन मार्केट केवल एक सेगमेंट नहीं, बल्कि एक समस्त न्यूट्रिशन रिवॉल्यूशन बन गया है।

आइए आज के इस आर्टिकल में भारत के प्रोटीन मार्केट को समझते हैं जिसमें ग्रोथ ड्राइवर्स, निवेशकों के लिए अवसर और भविष्य की संभावनाएं शामिल है।

क्या है मामला?

भारत दुनिया के सबसे बड़े प्रोटीन डेफिशियंसी वाले देशों में से एक है। देश की 73% आबादी में प्रोटीन की कमी पाई जाती है और औसतन, भारतीय केवल 47 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन लेते हैं, जबकि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क को 60 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए भारत में प्रोटीन से जुड़ी कंपनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है।

प्रोटीन सप्लीमेंट की डिमांड देशभर में असमान है जहां उत्तर भारत कुल मार्केट का 35% हिस्सा रखता है। यह क्षेत्रीय वितरण बताता है कि शहरीकरण, फिटनेस कल्चर और आय स्तर के अनुसार प्रोटीन उपभोग में बड़ा अंतर है।

साथ ही, भारत में प्रोटीन की इस कमी को पूरा करने के लिए कई बड़ी कंपनियाँ अपने प्रोटीन-पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं। McDonald’s ने अपने बर्गर्स में ‘प्रोटीन स्लाइस’ का विकल्प जोड़ा है, जबकि अमूल, ब्रिटानिया और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स अब प्रोटीन-समृद्ध डेयरी और स्नैक प्रोडक्ट लॉन्च कर रहे हैं।

भारत में प्रोटीन सप्लीमेंट मार्केट की ग्रोथ और सेगमेंट्स

मेट्रो शहरों में प्रोटीन सप्लीमेंट अपनाने का ट्रेंड ज्यादा दिख रहा है, लेकिन लखनऊ, सूरत, इंदौर जैसे शहरों की डिमांड भी बढ़ रही है। सोशल मीडिया, फिटनेस इंफ्लुएंसर और हेल्थ ऐप्स प्रोटीन पर जागरूकता बढ़ा रहे हैं।

  • व्हे प्रोटीन मार्केट: 2023 में साइज ₹795 करोड़ ($92.03 मिलियन), 2030 तक ₹1,078 करोड़ ($125.2 मिलियन), CAGR 5.08%।
  • प्लांट-बेस्ड प्रोटीन मार्केट: 2025 में ₹8,594 करोड़ ($998 मिलियन), 2030 तक ₹11,625 करोड़ ($1.35 बिलियन), CAGR 6.3%।
  • अल्टरनेटिव प्रोटीन मार्केट: 2023 में ₹6,853 करोड़ ($795.9 मिलियन), 2030 तक ₹12,658 करोड़ ($1.47 बिलियन), CAGR 9.1%।
  • माइक्रोपार्टिकुलेट व्हे प्रोटीन: 2024 में ₹27 करोड़ ($3.1 मिलियन), 2030 तक ₹43 करोड़ ($5.3 मिलियन), CAGR 9.8%।

प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की बढ़ती लोकप्रियता

वर्तमान में देश के 23 शहरों में 100 से अधिक स्टार्टअप्स प्लांट-बेस्ड, फर्मेंटेशन-डेराइव्ड और कल्टीवेटेड प्रोटीन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। Deloitte और GFI इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का स्मार्ट प्रोटीन मार्केट फिलहाल लगभग US$ 42 मिलियन का है, जो 2030 तक US$ 4.2 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।

हालांकि, इस इमर्जिंग इंडस्ट्री को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, भारत में मटर (Pea), सोया और चना जैसी फसलों की सीमित खेती के कारण अल्टरनेटिव प्रोटीन इंडस्ट्री को रॉ मटेरियल के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

विडंबना यह है कि दुनिया के शीर्ष दाल उत्पादक देशों में शामिल होने के बावजूद, भारत में प्रोटीन एक्सट्रैक्शन और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स के क्षेत्र में अभी भी इनोवेशन की कमी है। इसी वजह से देश अपनी लगभग 90% अल्टरनेटिव प्रोटीन चीन, यूरोप और पश्चिमी देशों से आयात करता है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

भारत का प्रोटीन मार्केट निवेशकों के लिए लंबी अवधि का अवसर बनता जा रहा है। 2024 से 2033 के बीच प्रोटीन सप्लीमेंट सेगमेंट के लगभग 2x बढ़ने का अनुमान है। फिटनेस, हेल्थकेयर और ई-कॉमर्स इस तेजी के प्रमुख ड्राइवर हैं।

Muscle Blaze और Optimum Nutrition मिलकर भारत के प्रोटीन पाउडर मार्केट का करीब 20% हिस्सा रखते हैं। Oziva और TrueBasics जैसी प्लांट-बेस्ड ब्रांड्स युवा और वेगन उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं, जबकि MyProtein न्यूट्रिशन मिक्स ब्लेंड्स के साथ अल्टरनेटिव प्रोटीन सेगमेंट में अग्रणी है।

पराग मिल्क फूड्स (Avvatar) ने व्हे प्रोटीन बाजार में मजबूत उपस्थिति बनाई है, वहीं हिमालया वेलनेस और ज़ाइडस वेलनेस (Zydus Wellness) डेली प्रोटीन सप्लीमेंट्स के जरिए व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंच रहे हैं।

भविष्य की बातें

रिपोर्ट बताती है कि 2024 में भारत का प्रोटीन सप्लीमेंट मार्केट लगभग US$ 860 मिलियन का था और 2033 तक इसके US$ 1.52 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, यानी यह सेक्टर लगभग 6.6% CAGR की दर से बढ़ रहा है।

सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट (जैसे अमिताभ बच्चन, M.S. धोनी, विराट कोहली), सोशल मीडिया ट्रेंड्स और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) कंपनियों ने इस सेक्टर को मुख्यधारा में ला दिया है। वहीं, सरकार भी सक्रिय भूमिका निभा रही है पोषण अभियान और ईट राइट इंडिया (FSSAI) जैसे अभियानों के ज़रिए सभी आयु वर्गों में संतुलित आहार और दैनिक प्रोटीन सप्लीमेंट्स के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, जागरूकता अभियान और डिजिटल फिटनेस कल्चर का प्रसार इस ट्रेंड को और मजबूत करेगा।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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