PSU बैंक्स का भविष्य: क्या रैली रहेगी जारी?

PSU बैंक्स का भविष्य: क्या रैली रहेगी जारी?
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हाल के दिनों में, भारतीय शेयर बाजार में एक दिलचस्प रुझान देखा गया है सरकारी बैंक (PSB) प्राइवेट सेक्टर के बैंकों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि पारंपरिक रूप से प्राइवेट बैंकों को अधिक आकर्षक निवेश विकल्प माना जाता रहा है। 

अभी हाल ही के वर्षो में ऐसा क्या हुआ है जिसकी वजह से PSUs बैंक्स ने निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दिए है अभी आप सोच रहे होंगे कि क्या यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है, तो चलिए इस पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते है।  

क्या है मामला?

सरकारी बैंकों (PSB) के लिए हालिया समय काफी बेहरीन रहा है पिछले एक महीने में निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स ने 8.5 प्रतिशत का शानदार प्रदर्शन किया है, जिसने प्राइवेट बैंकों और निफ्टी 50 इंडेक्स को पीछे छोड़ दिया है। यहां तक कि अगर हम एक साल पीछे जाते हैं, तो भी पब्लिक सेक्टर बैंकों के शेयरों ने प्राइवेट सेक्टर बैंक्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। 

इस शानदार प्रदर्शन के चलते दोनों के बीच वैल्यूएशन का अंतर काफी कम हो गया है, जिससे एनालिस्ट को दोनों के लिए अपनी रेटिंग पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित किया है। 

हालांकि, कई फैक्टर्स हैं जिन्होंने पब्लिक सेक्टर के बैंकों की रैली में मदद की है लेकिन क्या ये सभी फैक्टर्स इस तेजी को बनाए रखने के लिए पर्याप्त हैं? आइए आगे इन सवालों पर गौर करें।

सरकारी बैंकों के शेयरों में तेजी के मुख्य फैक्टर्स

बैड लोन (Bad Loans) में कमी: सरकारी बैंकों के फंसे हुए कर्ज यानि बैड लोन्स में बड़ी गिरावट आई है, जो उनकी एसेट क्वॉलिटी में सुधार का संकेत देता है। साथ ही मनीकंट्रोल के अनुसार, दिसंबर 2023 तक 14 लिस्टेड सरकारी बैंकों का औसत बैड लोन रेश्यो 4.2% था। वहीं, 16 लिस्टेड प्राइवेट सेक्टर के बैंकों का यह रेश्यो 3.0% था।

कमाई में बढ़ोतरी: बैड लोन्स कम होने एवं अन्य फैक्टर्स से सरकारी बैंकों की कमाई में काफी सुधार देखने को मिला है। 

कम वैल्यूएशन: अतीत में सरकारी बैंकों के शेयर काफी कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे थे, जिससे निवेशकों को खरीदारी का मौका मिला। जबकि प्राइवेट के बैंकों के शेयर पहले से ही हाई वैल्यूएशन पर थे, जिससे उनकी तुलना में सरकारी बैंक सस्ते लगने लगे। 

सरकारी एवं प्राइवेट बैंक्स का प्रदर्शन

अगर हम इस साल की बात करे तो निफ़्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स लगभग 5% डाउन है, जबकि निफ़्टी PSU बैंक इंडेक्स ने लगभग 20% का रिटर्न दिया है। यह बेहतरीन परफॉरमेंस का सिलसिला सिर्फ इस वर्ष ही नही बल्कि पिछले तीन वर्षो से चला आ रहा है। 

आप नीचे इमेज की मदद से समझ सकते है कि PSUs बैंक ने प्राइवेट बैंक्स की तुलना में कैसा परफॉर्म किया है:

PSU बैंक्स का भविष्य: क्या रैली रहेगी जारी?

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, अभी अगर हम एक निवेशक के रूप में वैल्यूएशन के नजरिए से देखे तो पहले PSU बैंको के शेयर प्राइवेट बैंको की तुलना में अच्छी वैल्यूएशन पर मिल रहे थे। जिसे आप इस चीज से समझ सकते है कि पहले प्राइवेट बैंको का PB रेश्यो 2.5 से 2.8 गुना के बीच था, जबकि सरकारी बैंको का PB रेशियो काफी कम, सिर्फ 0.4 से 0.6 गुना के बीच होता था। 

लेकिन अब चीजें बदल रही हैं, अभी प्राइवेट बैंको का वैल्यूएशन 2 से 2.4 PB रेशियो के दायरे में है, जबकि सरकारी बैंकों के शेयरों का वैल्यूएशन बढ़कर औसतन 1 से 1.3 PB रेशियो पर पहुंच गया है यानि कि अभी PSUs स्टॉक्स प्राइवेट बैंक्स के स्टॉक्स की तुलना में बेहतर वैल्यूएशन पर है। 

सरकारी बैंकों के लिए आगे की राह

मनी कंट्रोल के अनुसार, हाल ही में, बर्नस्टीन नाम की ब्रोकरेज फर्म ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शेयरों को ‘मार्केट परफॉर्म’ रेटिंग दे दी है। इसका मतलब है कि फर्म को भविष्य में स्टेट बैंक के शेयरों में ज्यादा तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्टेट बैंक के कैपिटल इम्प्रूवमेंट के प्रयासों की सराहना करते हुए टारगेट प्राइस को 710 रुपये से बढ़ाकर 780 रुपये कर दिया है।

यही नहीं, बर्नस्टीन ने सरकारी बैंकों के प्राइवेट बैंकों से पिछड़ने की भी बात कही है। पिछले तीन सालों में भले ही सरकारी बैंकों ने अच्छा प्रदर्शन किया हो, लेकिन आने वाले समय में कमजोर डिपॉजिट ग्रोथ और लोअर लिक्विडिटी बफर की वजह से उनकी अर्निंग ग्रोथ में प्राइवेट बैंकों जैसी तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। कुल मिलाकर, बर्नस्टीन का मानना है कि प्राइवेट बैंकों में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

आज के लिए सिर्फ इतना ही। उम्मीद करते है कि यह आर्टिकल आपको रोचक लगा होगा, इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। 

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।

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