सितंबर 2025 में भारतीय शेयर मार्केट एक बार फिर चुनौतियों और अवसरों के बीच झूलते रहा। एक तरफ जहाँ US H-1B वीज़ा फीस में बढ़ोतरी और भारत-अमेरिका व्यापारिक तनाव ने मार्केट पर दबाव बनाया, वहीं दूसरी तरफ US फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती और GST सुधार ने सकारात्मक माहौल बनाने का काम किया।
आइए समझते हैं कि सितंबर 2025 में मार्केट कैसा रहा है और इस रोलरकोस्टर मार्केट में आगे क्या उम्मीद की जा सकती है।
सितंबर 2025: मार्केट का प्रदर्शन
सितंबर 2025 का महीना भारतीय शेयर मार्केट के लिए मिश्रित रहा। महीने की शुरुआत में निफ्टी और सेंसेक्स में हल्की तेजी दिखी थी, लेकिन मध्य सितंबर में US H-1B वीज़ा फीस की घोषणा के बाद IT सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई। 22 सितंबर को IT सेक्टर में 3% तक की गिरावट आई, जिसका असर पूरे मार्केट पर पड़ा।
सितंबर के अंत तक निफ्टी 0.75% के सकारात्मक रिटर्न के साथ 24,611 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.57% सकारात्मक रिटर्न के साथ 80,267 पर रहा। महीने के दौरान PSU बैंक सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि IT और FMCG सेक्टर में दबाव बना रहा।

सितंबर के बड़े ट्रिगर्स
अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती: US फेडरल रिजर्व ने 2025 में पहली बार ब्याज दरों में 0.25% की कटौती की। यह कदम कमजोर होते जॉब मार्केट को संभालने के लिए उठाया गया। इस फैसले से भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में विदेशी निवेश आने की उम्मीद बढ़ी है।
H-1B वीज़ा का झटका: US सरकार ने नए H-1B वीज़ा के लिए शुल्क बढ़ाकर $1,00,000 कर दिया, जो पहले के मुकाबले बहुत ज़्यादा है। इस फैसले से भारतीय IT कंपनियों, जैसे TCS और इंफोसिस, पर करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है, जिससे उनके मुनाफे में 7-15% की कमी आ सकती है। इस खबर के बाद IT शेयर्स में भारी गिरावट आई। अमेरिका भारतीय IT कंपनियों का सबसे बड़ा मार्केट है, जो उनकी कुल आय का 85% तक योगदान देता है और इंडस्ट्री के 3–5% कर्मचारियों को ऑनसाइट रोजगार प्रदान करता है।
मजबूत इंडस्ट्रियल ग्रोथ: भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूती के संकेत दिए। जुलाई में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स (IIP) 3.5% बढ़ा, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का 5.4% का बड़ा योगदान था। वहीं, अगस्त में कोयला और स्टील जैसे प्रमुख सेक्टर्स का उत्पादन 15 महीने के उच्चतम स्तर 6.3% पर पहुंच गया।
GST दरों में कटौती: सितंबर में एक बड़ी सकारात्मक खबर GST काउंसिल की बैठक से आई। 3-4 सितंबर में हुई बैठक में दो-स्लैब GST स्ट्रक्चर (5% और 18%) को मंजूरी मिली। इस सुधार से 400 से अधिक प्रोडक्ट सस्ते हो गए हैं, जिससे त्योहारी सीज़न में कंजम्पशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। नई GST दरों से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान आदि की प्राइस में कमी आई है। यह नए टैक्स स्लैब 22 सितंबर से लागू हो चुके हैं।
अमेरिका के नए टैरिफ़: 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका ने कई प्रोडक्ट्स पर टैरिफ़ बढ़ाए हैं, जिसमें सबसे बड़ा झटका ब्रांडेड फ़ार्मा पर 100% शुल्क है। भारत का फ़ार्मा निर्यात FY24 में $27.9 बिलियन रहा था, जिसमें $8.7 बिलियन (31%) अमेरिका को जाता है। चिंता इसलिए है क्योंकि भारत अमेरिका को 45% से अधिक जेनेरिक दवाएं सप्लाई करता है और सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज़ जैसी कंपनियों की 30-50% कमाई US मार्केट पर निर्भर है।
हालांकि राहत यह है कि यह टैरिफ़ सिर्फ़ ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर लागू होगा, जबकि भारत का 85-90% निर्यात जेनेरिक दवाओं का है, जो इससे बाहर है। साथ ही, जो कंपनियां अमेरिका में प्लांट स्थापित कर रही हैं, उन्हें छूट मिलेगी। यानी चुनौतियां बनी रहेंगी, लेकिन जेनेरिक निर्यात और लोकल मैन्युफैक्चरिंग रणनीति भारत को सहारा दे सकती है।
सितंबर 2025: सेक्टोरल प्रदर्शन
पूरे सितंबर महीने के दौरान मेटल्स, डिफेंस और PSU बैंक्स में मजबूती दिखी, जबकि IT, टूरिज्म और कंस्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर पर दबाव बना रहा। चीन के आर्थिक सुधारों के कारण मेटल्स सेक्टर को सपोर्ट मिला तो ऑटो सेक्टर को भी GST दरों में राहत से मदद मिली। वहीँ, वीज़ा फीस के कारण IT सेक्टर को सबसे बड़ा झटका लगा।
सितंबर 2025 के दौरान अधिकांश प्रमुख सेक्टर्स में गिरावट देखी गई, जिसमें डिफेंस, रियल्टी, IT और मीडिया जैसे सेक्टर्स शामिल है। हालांकि फार्मा सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
अक्टूबर से क्या उम्मीद करें?
आने वाले दो महीने भारतीय मार्केट के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दो बड़े फैक्टर्स एक साथ आ रहे हैं: घटी हुई GST दरें, और त्योहारी सीजन की डिमांड। इन दोनों का संगम ऑटो, रिटेल और कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर्स के लिए एक बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है।
अक्टूबर माह भारतीय मार्केट के लिए बेहद अहम रहने वाला है क्योंकि TCS और HDFC बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के Q2 नतीजें आने की शुरुआत इसी महीने से होगी। त्योहारी सीजन की बिक्री के आंकड़ों तथा GST कलेक्शन के नए डेटा से भी मार्केट को दिशा मिल सकती है। इसके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल इवेंट्स और FIIs का इनफ्लो और ऑउटफ्लो मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर