नए साल में अपनाएं 5 असरदार वित्तीय योजना के टिप्स

नए साल में अपनाएं 5 असरदार वित्तीय योजना के टिप्स
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नया साल अक्सर अपनी फाइनेंशियल स्थिति को दोबारा देखने, सुधारने और नए लक्ष्य तय करने का सही समय होता है। इस समय आप अपने खर्च, बचत और निवेश को एक नई दिशा दे सकते हैं।

भारत की आर्थिक स्थिति भी मजबूत संकेत दिखा रही है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए RBI ने भारत की GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.8% से बढाकर 7.3% कर दिया है, जो पिछले वर्ष से बेहतर वृद्धि को दर्शाता है और FY26 Q2 में रियल GDP ग्रोथ 8.2% तक पहुंच गयी है।

जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूती की ओर बढ़ रही है, तो यह समय है कि आप भी अपनी पर्सनल फाइनेंशियल ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करें। नीचे दिए गए पांच टिप्स इसी दिशा में आपके लिए नए साल में बेहतर मार्गदर्शक हो सकते हैं।

1. बजट बनाएं और उसे लगातार ट्रैक करें

    बजट बनाना सिर्फ खर्च सीमित करने के लिए नहीं होता, बल्कि यह समझने के लिए होता है कि आपका पैसा कहां जा रहा है। अपनी मासिक आय और सभी खर्चों जरूरी और गैर-जरूरी को ध्यान में रखकर एक यथार्थवादी बजट बनाएं।

    इसके साथ-साथ, महीने के दौरान अपने खर्चों को ट्रैक करना भी जरूरी है ताकि यह समझ आ सके कि आप तय बजट के भीतर रह पा रहे हैं या नहीं। आज कई मोबाइल ऐप्स और डिजिटल टूल्स इस काम को आसान बनाते हैं।

    उदाहरण: यदि आप रोज़ के छोटे-छोटे खर्चों में ₹100 की कटौती कर लेते हैं, तो महीने के अंत तक यह राशि लगभग ₹3,000 हो सकती है, जिसे आप बचत या निवेश की ओर मोड़ सकते हैं।

    2. इमरजेंसी फंड को मजबूत बनाएं

      इमरजेंसी फंड आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग का वह हिस्सा है, जो अक्सर नजरअंदाज हो जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा काम आता है। मेडिकल खर्च, नौकरी में बदलाव या कोई अचानक बड़ा खर्च इन सब स्थितियों में यह फंड आपको कर्ज लेने से बचा सकता है।
      इसलिए, इमरजेंसी फंड को अलग खाते में रखना और इसे केवल जरूरत के समय ही इस्तेमाल करना एक समझदारी भरा कदम होता है।

      सुझाव: यदि आपका मासिक खर्च ₹40,000 है, तो ₹1,20,000 से ₹1,60,000 तक का इमरजेंसी फंड धीरे-धीरे बनाना एक संतुलित तरीका हो सकता है। हर महीने थोड़ा-थोड़ा जोड़ना भी पूरी तरह ठीक है।

      3. कर्ज और देनदारियों की दोबारा समीक्षा करें

        अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन जैसे हाई इंटरेस्ट वाले कर्ज हैं, तो वे आपकी फाइनेंशियल ग्रोथ में रुकावट बन सकते हैं। ऐसे कर्ज पर ब्याज लगातार बढ़ता रहता है, जिससे बचत और निवेश के लिए कम पैसा बचता है।

        इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने सभी कर्जों की सूची बनाएं और यह तय करें कि कौन-सा कर्ज पहले चुकाना ज्यादा फायदेमंद होगा।

        उदाहरण: ₹50,000 के क्रेडिट कार्ड बकाया पर 24% सालाना ब्याज का मतलब है कि आपको हर साल करीब ₹12,000 सिर्फ ब्याज में देने पड़ सकते हैं जो लंबे समय में बड़ा बोझ बन सकता है।

        4. निवेश रणनीति को समय-समय पर रिव्यू करें

          निवेश शुरू करना जरूरी है, लेकिन उसे बिना रिव्यू किए छोड़ देना सही नहीं है। समय के साथ आपके लक्ष्य, आय और जोखिम सहनशीलता बदल सकती है, और उसी के अनुसार निवेश रणनीति में भी बदलाव जरूरी हो सकता है।

          अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट, गोल्ड और अन्य एसेट्स का संतुलन बनाए रखना जोखिम को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करता है।

          सुझाव: यदि आपकी जोखिम क्षमता मध्यम है, तो इक्विटी और डेट के साथ थोड़ी मात्रा में गोल्ड या अन्य सुरक्षित एसेट्स को शामिल करना पोर्टफोलियो को ज्यादा स्थिर बना सकता है।

          5. फाइनेंशियल नॉलेज को लगातार बढ़ाते रहें

            फाइनेंशियल प्लानिंग में सही फैसले तभी लिए जा सकते हैं, जब आपको बुनियादी जानकारी हो। टैक्स, निवेश और रिटायरमेंट जैसे विषयों की समझ आपको गलत फैसलों से बचा सकती है। आज के समय में भरोसेमंद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, किताबें और वेबिनार्स सीखने के अच्छे साधन हैं।

            उदाहरण: हर सप्ताह एक फाइनेंशियल आर्टिकल पढ़ना या साल में एक ऑनलाइन कोर्स करना आपके फाइनेंशियल कॉन्फिडेंस को धीरे-धीरे मजबूत कर सकता है।

            इन पांच सुझावों को अपनाकर आप नए साल में अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को ज्यादा व्यवस्थित और संतुलित बना सकते हैं। यह कोई एक दिन का काम नहीं है, बल्कि लगातार सुधार की प्रक्रिया है।

            *यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
            *डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

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