US चुनाव 2024: भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव

US चुनाव 2024: भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव
Share

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 न सिर्फ अमेरिका के लिए, बल्कि ग्लोबल मार्केट्स के लिए भी काफी अहम् है। भारतीय निवेशक भी इस चुनाव पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि अमेरिका की नीतियों का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है। क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प और कमला हैरिस जैसे प्रमुख उम्मीदवारों की जीत और नीतियां भारतीय IT सेक्टर, व्यापारिक संबंधों और करेंसी मार्केट को प्रभावित कर सकती है।

आइए समझते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और इसका क्या प्रभाव हो सकता है।

क्या है मामला?

5 नवंबर 2024 को होने वाले US राष्ट्रपति चुनावों का भारतीय बाजारों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है। अमेरिकी चुनाव 2024 की बात करें, 2024 के चुनाव में प्रमुख उम्मीदवारों में डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस शामिल हैं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी हद तक अमेरिकी चुनाव परिणामों पर निर्भर करते हैं, क्योंकि भारत की शीर्ष IT कंपनियों का 50% से अधिक रेवेन्यू US मार्केट से ही आता है, इसलिए इन चुनावों का प्रभाव निश्चित रूप से इन कंपनियों के प्रदर्शन पर देखा जा सकता है।

US चुनाव 2024 का भारत पर असर

US चुनाव 2024 भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता हैं, खासकर भारतीय IT इंडस्ट्री के लिए, क्योंकि अगर ट्रंप फिर से चुनाव जीतते हैं, तो अमेरिकी कंपनियों में भारत से आउटसोर्सिंग के मामलों में संभावित कमी हो सकती है, क्योंकि ट्रंप की नीतियाँ अधिकतर ‘अमेरिका फर्स्ट’ पर आधारित रही हैं और इतिहास की बात करें तो ट्रंप के प्रशासन के दौरान हुए H1-B वीज़ा में बदलाव, भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा मुद्दा था।

इसके दूसरी ओर, अगर कमला हैरिस चुनाव जीतती हैं, तो भारतीय कंपनियों को थोड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि उनकी नीतियाँ ट्रंप की तुलना में अधिक प्रगतिशील मानी जा रही हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान सेंसेक्स का प्रदर्शन

इतिहास में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों का भारतीय शेयर बाजार पर गहरा प्रभाव देखा गया है। उदाहरण के लिए, 2008 में चुनाव से एक महीने पहले सेंसेक्स 9,788 था, जो चुनाव के एक महीने बाद गिरकर 9,385 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 2020 में सेंसेक्स चुनाव से एक महीने पहले 38,068 था, जो चुनाव के एक महीने बाद 47,751 तक बढ़ गया। इसके साथ ही, 2024 में चुनाव से एक महीने पहले सेंसेक्स 84,300 पर था, और अभी देखना है कि आने वाले दिनों में चुनाव के रिजल्ट के बाद सेंसेक्स कहा जाता है।

2008 से 2024 तक अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान सेंसेक्स के उतार-चढ़ाव के आंकड़ों का विश्लेषण।

US चुनाव का भारतीय रुपया पर असर

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों का असर न केवल अमेरिका बल्कि भारतीय स्टॉक मार्केट के साथ – साथ रुपये पर भी पड़ता है। हर चुनावी वर्ष के दौरान, भारतीय करेंसी के प्राइस में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, जो ग्लोबल आर्थिक नीतियों और राजनीतिक अनिश्चितताओं का परिणाम होता है।

2008, 2012 और 2020 के चुनाव के बाद रुपये में डॉलर के मुकाबले सबसे ज्यादा गिरावट देखी गयी है।

US राष्ट्रपति चुनावों के विभिन्न वर्षों (2000, 2004, 2008, 2012, 2016, 2020) के दौरान USD/INR विनिमय दर में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। हर चुनाव के समय रुपये की कीमत में बदलाव हुआ है, जो ग्लोबल आर्थिक स्थितियों और राजनीतिक बदलावों का परिणाम है। 2000 से 2024 तक, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता गया, और चुनावी सालों के दौरान ये उतार-चढ़ाव को स्पष्ट रूप से चार्ट में देख सकते है।

अमेरिका के राष्ट्रपतियों के साथ भारत के बदलते रिश्ते

भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों का काफी पुराना इतिहास रहा है। विभिन्न अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने भारत के साथ अलग-अलग समय पर विभिन्न सहयोग और संबंध स्थापित किए। प्रारंभिक वर्षों में, दोनों देशों के बीच औपचारिक संबंध स्थापित हुए, जबकि बाद के दशकों में व्यापार, डिफेंस, और आर्थिक सहयोग में मजबूती आई।

यह टेबल भारत और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच हुए संबंधों की मुख्य झलक पेश करती है, जो समय के साथ और मजबूत होते गए हैं।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

अगर इतिहास के चुनाव और भारतीय IT सेक्टर के संबंध को देखा जाए तो पता चलता है कि जब कोई रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनाव जीतता है, तो भारतीय IT सेक्टर में चुनाव के बाद तीन महीनों में मिक्स्ड या नकारात्मक रिटर्न देखने को मिलते हैं। क्योंकि यह माना जाता है कि रिपब्लिकन नीतियां आउटसोर्सिंग को सीमित कर सकती हैं या अमेरिकी नौकरियों पर जोर दे सकती हैं।

वहीं, डेमोक्रेट उम्मीदवार की जीत भारतीय IT स्टॉक्स को बढ़ावा देती है। इसे आप इस बात से समझ सकते है कि नवंबर 2020 में डेमोक्रेट उम्मीदवार की जीत के तीन महीनों में TCS, इंफोसिस, विप्रो और HCL टेक में 17% – 29% की तेजी देखी गयी, जबकि नवंबर 2016 में रिपब्लिकन उम्मीदवार की जीत के बाद इन कंपनियों में मिक्स्ड या नकारात्मक रिटर्न देखने को मिले।

भविष्य की बातें

आगामी नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम न केवल ग्लोबल स्तर पर बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होने वाले है। इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रमुख मुद्दा टैरिफ रहा है। जहां पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी आयातित वस्तुओं पर 10% टैरिफ और चीन से आयात पर 60% टैरिफ लगाने की योजना बनाई है। वहीं, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस ने टैरिफ की आलोचना करते हुए इसे ‘सेल्स टैक्स’ कहा है, जो अंततः अमेरिकी परिवारों पर बोझ डालता है।

इसके अलावा, इमिग्रेशन पॉलिसी भी भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित करेंगी। कमला हैरिस अधिक उदार इमिग्रेशन पॉलिसी का समर्थन करती हैं, रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप का रुख इससे विपरीत है।

आज के लिए सिर्फ इतना ही है। उम्मीद करते है यह जानकारी आपको रोचक लगी होगी। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Edge Subscription Fee
Min. Investment

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top