नए संवत से पहले मार्केट में निवेशक क्यों होते बुलिश? जानें वजह

नए संवत से पहले मार्केट में निवेशक क्यों होते बुलिश? जानें वजह
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दिवाली केवल रोशनी का त्योहार ही नहीं, बल्कि फाइनेंशियल मार्केट्स के लिए भी महत्वपूर्ण मोड़ है। भारत में लाखों निवेशक इस अवसर को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत मानते हैं और इस दौरान शेयर मार्केट में प्रवेश करते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जहां लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ निवेश को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

लेकिन सवाल यह है कि दिवाली से पहले निवेशक इतने उत्साही क्यों हो जाते हैं? और त्योहार के बाद मार्केट का क्या होता है? आइए समझते है।

दिवाली से पहले की तेजी का इतिहास

पिछले दस वर्षों (2015-2024) के आंकड़े बताते हैं कि निफ्टी50 ने दिवाली से पहले के सप्ताह में दस में से छह बार सकारात्मक रिटर्न दिया है। औसत लाभ 0.78% रहा है, जो निवेशकों के बीच त्योहारी सीजन के प्रति सकारात्मक भावना को दर्शाता है। सबसे मजबूत रैली 2020 में देखी गई जब निफ्टी ने दिवाली से पहले के सप्ताह में 4.20% की छलांग लगाई, उसके बाद 2022 में 2.40% की बढ़त दर्ज की गई। यह प्रदर्शन केवल संयोग नहीं है। दिवाली के दौरान कई फैक्टर्स एक साथ मिलकर मार्केट को ऊपर की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

वर्तमान में भी भारतीय शेयर मार्केट मजबूत ट्रेंड दिखा रहा है। विदेशी निवेशकों की वापसी, बेहतर कॉर्पोरेट अर्निंग्स आउटलुक, और संभावित भारत–US ट्रेड डील की उम्मीदों ने मार्केट सेंटीमेंट को बल दिया है। BSE-लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹467 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है जो पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से केवल 2.3% नीचे है। अक्टूबर की शुरुआत से ही निवेशकों ने करीब ₹16 लाख करोड़ की नई वैल्यू जोड़ी है, जो निवेशकों को नई उम्मीद देता है।

मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा और प्रदर्शन

मुहूर्त ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजार की एक ऐतिहासिक परंपरा है, जो निवेशकों के लिए नए वर्ष (विक्रम संवत) की शुभ शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। 2025 में यह विशेष सेशन 21 अक्टूबर को दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे तक आयोजित होगा, जिससे विक्रम संवत 2082 का आरंभ होगा। यह परंपरा 1957 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और 1992 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा शुरू की गई थी।

पिछले 10 संवत वर्षों में मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन ने निफ्टी और सेंसेक्स पर आम तौर पर हल्की लेकिन सकारात्मक बढ़त दर्ज की है, जहां औसत रिटर्न प्रायः 1% से कम रहा है। इन सेशन में तेज़ी या मंदी से अधिक भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव देखने को मिलता है। 2022 में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन देखा गया जब सेंसेक्स 0.87% बढ़ा। 2018 में भी 0.70% की वृद्धि हुई। हालांकि, 2016 और 2017 में नकारात्मक रिटर्न भी दर्ज किए गए।

दिवाली के बाद का प्रदर्शन: मिथक या सच्चाई?

अक्सर यह कहा जाता है कि दिवाली के बाद शेयर मार्केट में गिरावट आती है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं। पिछले दस वर्षों के डेटा के अनुसार, दिवाली के बाद के सप्ताह में निफ्टी ने दस में से छह बार सकारात्मक रिटर्न दिया है, औसतन लगभग 0.40% की बढ़त के साथ।

दिलचस्प बात यह है कि 2020 और 2022 जैसे वर्षों में, जब दिवाली से पहले मार्केट में जबरदस्त रैली देखने को मिली, उसके बाद भी सकारात्मक रिटर्न जारी रहे। यह साफ संकेत देता है कि ‘दिवाली के बाद गिरावट’ की धारणा एक मिथक से अधिक कुछ नहीं है। वास्तविकता यह है कि निवेशक भावना और आर्थिक बुनियादें, दोनों मिलकर मार्केट ट्रेंड तय करते हैं न कि सिर्फ त्योहार का समय।

निवेश दिवाली से पहले बुलिश क्यों हो जाते हैं?

पॉजिटिव ट्रेंड का इतिहास: पिछले 10 संवत वर्षों में निफ्टी का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। इस अवधि में निफ्टी ने 10 में से 7 बार डबल-डिजिट (10% से अधिक) वार्षिक रिटर्न दिए हैं, जबकि औसत रिटर्न लगभग 13% रहा है।

सेल्स में उछाल: अक्टूबर 2024 में त्योहारी सीजन के दौरान भारत में रिटेल ऑटो सेल्स में 12%, टू-व्हीलर सेल्स में 14% और पैसेंजर व्हीकल्स 7% ग्रोथ देखने को मिली। इसी अवधि में ई-कॉमर्स सेल्स 23% की बढ़त के साथ $12 बिलियन (₹1 ट्रिलियन) के पार पहुंचीं, जबकि FMCG सेगमेंट में 8–12% और टियर-2 शहरों में ज़रूरी वस्तुओं की सेल्स 30% तक उछली। यह दर्शाता है कि फेस्टिव सीजन में डिमांड मजबूत बनी रहती है।

खर्च में बढ़ोत्तरी: अक्टूबर 2024 में क्रेडिट कार्ड खर्च ₹2.02 ट्रिलियन तक पहुंच गया, जो सितंबर की तुलना में 14.5% और 2023 की तुलना में 13% अधिक था। वहीं, UPI ट्रांजैक्शन ने उसी महीने रिकॉर्ड 16.6 बिलियन ट्रांजैक्शन दर्ज किए, जो साल-दर-साल 37% की वृद्धि दर्शाते हैं।

अर्निंग सीजन की शुरुआत: कंपनियों की Q3 (अक्टूबर-दिसंबर) अर्निंग सीजन शुरू होता है और कंपनियां Q2 के नतीजे जारी करती है। इसके साथ ही, मैनेजमेंट द्वारा दी जाने वाली गाइडलाइन्स से स्टॉक्स में निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।

रिटेल निवेशकों की भागीदारी: ‘शुभ’ भावना रिटेल निवेशकों को नए निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है, खासकर विशेष ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सेशन के दौरान, जो मार्केट सेंटीमेंट को और बेहतर बनाता है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

निकट भविष्य में प्रमुख ट्रिगर त्योहारी सीजन में विभिन्न कंस्यूमर श्रेणियों में वास्तविक डिमांड की वृद्धि होगी, जो GST दर कटौती और संभावित US-भारत व्यापार समझौते से प्रेरित है। भारतीय मार्केट पिछले 9–12 महीनों से साइडवेज और कंसॉलिडेशन फेज में रहा है, लेकिन समय की करेक्शन के साथ वैल्यूएशन और अधिक उचित हुए हैं निफ्टी 50 का फॉरवर्ड P/E अब 21x से नीचे है, जो FY27 में ग्रोथ बढ़ने की संभावना के बीच अच्छे एंट्री स्तर का संकेत देता है।

नए निवेशक इस संवत अपनी निवेश यात्रा की शुरुआत कर सकते है, हालांकि निवेशकों को हमेशा कई फैक्टर्स पर विचार करना और सावधानीपूर्वक रिसर्च करने के बाद ही स्टॉक्स का चयन करना चाहिए।

संवत 2082 में कैसा रहेगा मार्केट?

इंडियाटुडे के अनुसार, चॉइस ब्रोकिंग का मानना है कि निवेशक इस समय का उपयोग बिल्ड करने के लिए करें, इंतजार करने के लिए नहीं। लॉन्गटर्म निवेशकों के लिए अब धीरे-धीरे पोर्टफोलियो बढ़ाना अगले उछाल के लिए मजबूत बेस तैयार कर सकता है। इसके साथ ही, निफ्टी का लक्ष्य दिवाली 2026 तक 26,500–28,000 रखा गया है।

दिवाली से पहले निवेशकों का बुलिश होना केवल परंपरा नहीं बल्कि डेटा-समर्थित रणनीति है। पिछले एक दशक के आंकड़े भी दर्शाते हैं कि दिवाली के आसपास का समय मार्केट के लिए सकारात्मक रहा है, जबकि दिवाली के बाद गिरावट का मिथक अक्सर गलत साबित हुआ है। इसलिए, दिवाली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि सही रणनीति के साथ वेल्थ क्रिएशन का अवसर भी बन सकती है।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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