डिफेंस सेक्टर में जबरदस्त तेजी: क्या यह जारी रहेगी?

डिफेंस सेक्टर में जबरदस्त तेजी: क्या यह जारी रहेगी?
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पिछले कुछ महीनों में दलाल स्ट्रीट ने डिफेंस सेक्टर में अभूतपूर्व उछाल देखा है। यह एक रोमांचक समय है, क्योंकि डिफेंस सेक्टर ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी सरकारी पहलों के समर्थन से निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। मध्य पूर्व में जिओपॉलिटिकल तनाव में कमी और डिफेंस मंत्रालय द्वारा 1.05 लाख करोड़ रुपये की खरीद योजनाओं की मंजूरी ने इस रैली को और अधिक सहारा दिया है।

लेकिन क्या यह तेजी सस्टेनेबल है, और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है? आइए तेजी के पीछे के फैक्टर्स, और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण करें।

क्या है मामला?

2025 की पहली छमाही में भारतीय डिफेंस सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया है, जिसमें 34.82% की प्रभावशाली रिटर्न के साथ यह सभी अन्य सेक्टोरल इंडेक्स को पीछे छोड़ चुका है। इस दौरान निफ्टी ने केवल 5.49% की वृद्धि दर्ज की, जबकि IT और फार्मा जैसे सेक्टर क्रमशः 12.18% और 6.43% की गिरावट के साथ जूझ रहे हैं।

2025 में डिफेंस सेक्टर में भारी उछाल देखने को मिला। जानिए क्या हैं इसके पीछे की वजह और क्या यह ग्रोथ बनी रहेगी?

H1CY25 में भारतीय डिफेंस सेक्टर 34.8% के रिटर्न के साथ अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स को पीछे छोड़ चुका है।

डिफेंस सेक्टर की यह तेजी मुख्य रूप से पब्लिक सेक्टर की कंपनियों (PSUs) जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के मजबूत प्रदर्शन के कारण है। इन कंपनियों ने मजबूत ऑर्डर बुक, निरंतर एग्जीक्यूशन, और बेहतर मार्जिन की बदौलत निवेशकों का विश्वास जीता है।

सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और डिफेंस निर्यात पर बढ़ते जोर ने इस सेक्टर को और मजबूती दी है। इसके अलावा, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मिडल ईस्ट के कई देशों के साथ हुए डील्स ने हाल के महीनों में इस सेक्टर की ग्लोबल मौजूदगी को और विस्तार दिया है।

सरकारी नीतियों और जियोपॉलिटिकल फैक्टर्स का प्रभाव

03 जुलाई 2025 को रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजीशन काउंसिल (DAC) ने करीब ₹1.05 लाख करोड़ की कैपिटल एग्जीक्यूशन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इन 10 प्रस्तावों के तहत सभी डिफेंस उपकरणों और सिस्टम की खरीद पूरी तरह से देश की डोमेस्टिक कंपनियों से की जाएगी।

यह DAC की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली बैठक थी, जिसमें देश की डिफेंस तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस कदम से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के साथ-साथ सैन्य आधुनिकीकरण को भी गति मिलेगी।

इसके अलावा, मध्य पूर्व में कम हुए जियोपॉलिटिकल तनाव और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य हमलों ने भी डिफेंस स्टॉक्स में निवेशक रुचि को बढ़ाया। यह तेजी डिफेंस सेक्टर की लॉन्ग-टर्म संभावनाओं और सरकार के आधुनिकीकरण प्रयासों में निवेशकों के विश्वास को दर्शाती है।

डिफेंस म्यूचुअल फंड्स का शानदार प्रदर्शन

डिफेंस सेक्टर की थीमैटिक म्यूचुअल फंड्स ने भी निवेशकों को प्रभावशाली रिटर्न प्रदान किए हैं। पिछले तीन महीनों मे मोतीलाल ओसवाल निफ्टी इंडिया डिफेंस ETF ने 38.58% का रिटर्न दिया, जबकि ग्रो निफ्टी इंडिया डिफेंस ETF और FoF ने क्रमशः 38.48% और 38.32% का रिटर्न दर्ज किया। HDFC डिफेंस फंड, जो इस श्रेणी में एकमात्र सक्रिय रूप से मैनेज्ड फंड है, ने 30.04% का रिटर्न दिया और अपने लॉन्च के बाद से 60% की वृद्धि दर्ज की।

यह प्रदर्शन डिफेंस सेक्टर में बढ़ती निवेशक रुचि को दर्शाता है, जो स्वदेशीकरण, आधुनिकीकरण, और डिफेंस निर्यात जैसे थीम्स से प्रेरित है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

H1 CY2025 में डिफेंस स्टॉक्स का शानदार प्रदर्शन रहा, जहां सिका इंटरप्लांट सिस्टम्स ने 172%, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स ने 85%, मझगांव डॉक में 45%, कोचीन शिपयार्ड ने 35% और अपोलो माइक्रो सिस्टम्स जून के अंत में कुछ प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद 67% की मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ।

हालांकि, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, आनंद राठी वेल्थ के ऋषिकेश पलवे निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं, उनके मुताबिक, ऐसे सेक्टर्स अक्सर साइक्लिकल होते हैं और इनमें सही समय पर एंट्री और एग्ज़िट करना ज़रूरी होता है, जो आम निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनका मानना है कि केवल मौजूदा तेजी के आधार पर निवेश करना समझदारी नहीं होगी। निवेशकों को लॉन्ग टर्म दृष्टिकोण और मजबूत फंडामेंटल्स को प्राथमिकता देनी चाहिए।

भविष्य की बातें

डिफेंस सेक्टर का भविष्य आशाजनक दिखता है, लेकिन यह कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। सरकार की स्वदेशीकरण और निर्यात वृद्धि पर जोर, भारत का 2025 तक डिफेंस निर्यात $5 बिलियन का लक्ष्य, साथ ही 1.05 लाख करोड़ रुपये की हालिया खरीद योजनाएं, सेक्टर की लॉन्ग-टर्म संभावनाओं को मजबूत करती हैं।

इसके साथ ही, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल ही में NATO द्वारा लॉन्ग-टर्म डिफेंस खर्च बढ़ाने की घोषणा ने भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोले हैं। कई भारतीय कंपनियां अब ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन का हिस्सा बन चुकी हैं, जिससे एनालिस्ट को उम्मीद है कि विदेशों से और अधिक ऑर्डर मिलेंगे।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

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